समस्या
एक प्रवर्तक कुछ ही हफ़्तों में वर्षों और भारी पूँजी उस विस्तार में लगाने वाले थे जिसका आस-पास हर कोई समर्थन कर रहा था।
हमारा तरीका
हमने योजना को आँकड़ों और बाज़ार की कसौटी पर कसा, उस एकमात्र अनुमान को अलग किया जिस पर पूरा मामला टिका था।
परिणाम
फ़ैसला मौजूदा शर्तों पर स्पष्ट ‘ना’ था, साथ ही वह सटीक शर्त बताई गई जिसके पूरा होने पर यह ‘हाँ’ बन जाता। दाँव को छोड़ा नहीं, बल्कि नए सिरे से गढ़ा गया।