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G A Sheth & Associates

जो मदद हमें ख़ुद चाहिए थी।

कोई सजी-सँवरी शुरुआत की कहानी नहीं। सच इससे कहीं सीधा है: हम बार-बार ऐसी दिक़्क़तों से टकराए जिन्हें अकेले नहीं सुलझा पाए, मदद ढूँढने निकले, और जैसी मदद चाहिए थी वैसी शायद ही मिली। तो एक दिन हमने ख़ुद वही बनने की ठान ली।

हम सबने कभी न कभी वो एक्सपर्ट हायर किया है जो 'बस अभी ठीक कर देगा', और फिर बात बनने के बजाय बिखरते देखी है: काम लंबा खिंचा, ख़र्च समस्या से ज़्यादा हो गया, और असली दिक़्क़त वहीं की वहीं रही। आप बताते हैं गड़बड़ क्या है, वे सिर हिलाते हैं, और फिर उसी का वो हिस्सा सुलझाते हैं जो उनके बेचने के सामान में फ़िट बैठता है।

ग़लत नीयत शायद ही रही हो। एक्सपर्ट गहराई में देखता है, पर बस अपनी ही लकीर पर, और कई तो उस लकीर को ज़िद से पकड़े रहते हैं, हर अनजानी बात को 'ये तो सौ बार देखी है' कहकर टाल देते हैं। लक्षण पर मरहम लगता रहता है और असली रोग अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है। और चूँकि वो कभी सचमुच उनका मामला था ही नहीं, बात भारी होते ही रुकने की कोई ख़ास वजह उनके पास नहीं बचती। भरोसा घटता है। और अक्सर अंत एक ही तरह होता है: या तो आप उन्हें छोड़ देते हैं, या ख़ुद कमर कस लेते हैं।

ख़ुद कर लेना कोई जीत नहीं। आपके पास चलाने को एक कारोबार है और जीने को एक ज़िंदगी, वो काम जो सिर्फ़ आप कर सकते हैं। जिस दिक़्क़त का ज़िम्मा आपने पैसे देकर किसी और को सौंपा था, उसी के लिए ख़ुद माहिर बन जाना, यही तो आप नहीं चाहते थे।

हमने यही सीखा कि जो चीज़ कम पड़ रही थी वो कभी 'और ज़्यादा एक्सपर्टीज़' नहीं थी। वो थी नीयत: तय दायरे से आगे सोचने की, मेज़ के आपके वाले तरफ़ बैठने की, और तब तक लगे रहने की जब तक बात सचमुच बन न जाए। ये किसी डिग्री के साथ नहीं आती। ये तब आती है जब आपने अपना पैसा, अपना नाम और अपनी नींद दाँव पर लगाई हो, उसे नाकाम होते देखा हो, और फिर भी रास्ता निकाला हो।

यही हम हैं। उद्यमी और ऑपरेटर, जिन्होंने बोझ उठाया है, जोखिम लिया है, बुरी तरह गिरे हैं और फिर उठ खड़े हुए हैं। हम उस अकेलेपन को जानते हैं जो सिर्फ़ आपकी अपनी दिक़्क़त लेकर आता है, और उस घुटन को भी जो उसे बढ़ते देखकर होती है जब आपके हायर किए लोग मुँह फेर लेते हैं। इसलिए जब कोई हमें उसी जगह फँसा दिखता है, हमसे रहा नहीं जाता। घंटे बेचने वाले वेंडर की तरह नहीं, बल्कि उन लोगों की तरह जो ठीक वहीं खड़े रह चुके हैं, पलटकर हाथ बढ़ाते हुए।

हम ये इसलिए करते हैं क्योंकि हम ख़ुद जानते हैं कि जब कोई सचमुच परवाह करने वाला साथ हो, तो कितना फ़र्क पड़ता है।

वो प्रॉब्लम हमारे पास लाइए जिस पर आप ख़ुद उँगली नहीं रख पा रहे।

आइए देखें, क्या आपकी तलाश यहाँ पूरी होती है।